Sahil writer

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दिल मे


दिल मे......


आज दिल को ना जाने क्या सुजाई है 
मुझे मेरे बचपन की फिर से याद दिलाई है 

अल्लड नटखट पन से सजा मेरा संसार 
दुखो से कोसो दूर था मेरा बागवान 

बचपन की सखियाँ करती थी ढेरों बतिया 
घर घर का खेल खिलाए ये मुझे सारी रतिया 

पट से लड़ती थी झट से गले लगती थी 
मुझको तो फोकट मे चने के झाड़ पर चढाती थी 

खुद लड़ के आती थी लोगो मे आग लगाती थी 
ज़ब आफ़त आती कोई झट मुझे आगे कर खुद पीछे चुप जाती थी 

याद बहुत आती है मुझे अब सबकी 
ना जाने कहाँ कहाँ गुम है ये सारी 

साहिल राइटर ✍️✍️

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1 Comments

बेहतरीन लाजवाब

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